कलिका
कलिका निश्चय किया आज कलिका ने सपनों को साकार करूँगी ज्ञान तूलिका निज कर लेकर जीवन में नवरंग भरूँगी। अंतस- प्यास लिखेगी मेरी इस जगती में नई कहानी खुद पर अब करूँगी भरोसा मशाल रोशनी की जलानी चीर तमस की मोटी चादर मन में ज्ञान बीज रोपूँगी जीवन में नवरंग भरूँगी।। पुहुप ज्ञान के मुस्काएँगे सुगंध चहुँ दिश नित बिखरेगी बढ़ेगा ज्ञान पौध गगन तक हृदय-धरा पोषित झूमेगी विकसित पल्लव के संग-संग सीढ़ी ज्ञान की मैं चढूँगी जीवन में नवरंग भरूँगी।। साकार कल्पनाएँ होंगीं इंद्रधनुष आँगन उतरेगा होगा एक नवीन सवेरा डर-अँधेरा दूर छिटकेगा ज्ञान-लेखनी जब चमकेगी सूरज- वसन बना पहनूँगी जीवन में नवरंग भरूँगी।। -----अनीता सिंह"अनित्या"